Sunday, November 18, 2018

निरंकारी भवन पर हमला, तीन की मौत

पंजाब पुलिस के मुताबिक रविवार को अमृतसर के पास एक निरंकारी भवन पर हुए एक हमले में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई है जबकि 19 घायल हैं.

अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर ने बीबीसी से इसकी पुष्टि की है.

अमृतसर सीमा रेंज के आईजी सुरिंदर पाल परमार ने बीबीसी के सहयोगी रविंदर सिंह रोबिन को बताया है कि ये एक ग्रेनेड हमला हो सकता है.

चश्मदीदों ने बताया है कि दो युवक निरंकारी भवन के पास पहुंचे और उन्होंने वहां गेट पर खड़ी एक लड़की को पिस्टल दिखाई और विस्फोटक सामग्री फेंक दी.

बताया जा रहा है कि दोनों अज्ञात हमलावर बाइक पर सवार थे.

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निरंकारी भवन में हर रविवार सतसंग होता है, धमाके के वक्त भी सतसंग चल रहा था जिस वजह से मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.

एक चश्मदीद ने बीबीसी को बताया, "दोनों ही हमलावर पंजाबी बोल रहे थे. उन्होंने मुंह और सर पर कपड़ा बांधा हुआ था. उन्होंने हमला करने के दौरान किसी तरह का कोई नारा नहीं लगाया."

जालंधर में छावनी इलाक़े में धमाका
पुलिस ने कहा है कि वे इस धमाके की जांच कर रहे हैं और फ़िलहाल इसे चरमपंथी हमले से जोड़ना जल्दबाज़ी होगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पंजाब में पहले से ही अलर्ट घोषित किया गया था क्योंकि ऐसी खबरें थीं कि चरमपंथी समूह जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 5 या 6 लोग पंजाब के फ़िरोज़पुर इलाके़ में हो सकते हैं.

वहीं अमृतसर के ज़िलाधिकारी कुलदीप सिंह रंधावा ने कहा, "अभी ये नहीं कहा जा सकता है कि कौन इसके पीछे है. अभी तक की जांच से सीमापार से किसी का हाथ होने विस्तृत जांच के बाद ही कुछ ठोस आधार पर कहा जा सकता है."

पहले से मिले इंटेलिजेंस इनपुट के सवाल पर रंधावा ने कहा, "जो इंटेलिजेंस इनपुट मिले थे वो इससे अलग तरह के थे."

अकाली दल के नेता विरसा सिंह वल्तोहा ने कहा कि यह हमला दिखाता है कि राज्य में हाई अलर्ट होने के बावजूद सरकार गंभीर नहीं है और इस तरह के धमाके हो रहे हैं.

Tuesday, November 6, 2018

और मजबूत होगा कांग्रेस-जेडी (एस) गठबंधन, बीजेपी को झटका

कर्नाटक की 3 लोकसभा सीटों और 2 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं। कांग्रेस-जेडी (एस) गठबंधन मजबूत होकर उभरा है जबकि बीजेपी की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कर्नाटक के साथ ही चुनाव में जाने वाले दूसरे राज्यों और 2019 लोकसभा चुनावों पर इन नतीजों का क्या असर होगा।

कर्नाटक की 3 लोकसभा और 2 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों में कांग्रेस-जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। दो विधानसभा और 2 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज कर गठबंधन ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को तगड़ा झटका दिया है, जो इन चुनावों के जरिए कर्नाटक विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव, दोनों पर निशाना लगाने की तैयारी में थी। बीजेपी के हाथ केवल शिमोगा लोकसभा सीट आई है जबकि कांग्रेस-जेडी (एस) गठबंधन ने मांड्या और बेल्लारी लोकसभा सीटें अपने नाम की हैं। वहीं, रामनगर और जामखंडी विधानसभा सीट भी गठबंधन के खाते में गई हैं। इसी के साथ बीजेपी की विधानसभा में ताकत बढ़ाने की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। 

आपको बता दें कि जिन पांच सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आए हैं, उनमें चार सीटें इस्तीफे की वजह से और एक सीट विधायक के निधन की वजह से खाली हुई थी। शिमोगा लोकसभा सीट बीएस येदियुरप्पा (बीजेपी), बेल्लारी लोकसभा सीट श्रीमुलु (बीजेपी) और मांड्या संसदीय सीट सीएस पुट्टाराजू (कांग्रेस) के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। वहीं रामनगर सीट से सीएम कुमारस्वामी (कांग्रेस) के इस्तीफे और जामखंडी सीट कांग्रेस विधायक सिद्धू न्यामगौड़ा (कांग्रेस) के निधन के बाद खाली हुई थी। अब नतीजों के बाद बेल्लारी और मांड्या कांग्रेस के खाते में गई तो बीजेपी को सिर्फ शिमोगा से संतोष करना पड़ा। बाकी दो विधानसभा सीटों पर भी कांग्रेस को ही जीत मिली। कुल मिलाकर बीजेपी को एक लोकसभा सीट का नुकसान उठाना पड़ा। 

5 राज्यों के विधानसभा चुनाव पर भी नतीजे का असर! 
इन उपचुनावों पर सभी की निगाहें इसलिए टिकी थीं क्योंकि इनके नतीजों का असर कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन पर भी पड़ेगा। मई में हुए चुनावों के दौरान दोनों पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ लड़ी थीं लेकिन नतीजे आने के बाद गठबंधन कर लिया था। पांच सीटों में कांग्रेस ने जामखंडी और बेल्लारी और जेडीएस ने शिमोगा, रामनगर और मांड्या में प्रत्याशी उतारे। ऐसे में 2019 चुनाव से पहले गठबंधन की ताकत, आपसी तालमेल और जनता पर असर की परख इन चुनावों में देखने को मिली। गठबंधन के प्रदर्शन बीजेपी के लिए मुश्किल हालात पैदा हो गए हैं।

दूसरे राज्यों पर असर
इन नतीजों से गठबंधन की राजनीति को ताकत मिलने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं और अगले साल लोकसभा चुनाव होंगे। कांग्रेस-जेडी(एस) का पहले से ही मानना है कि इन राज्यों के चुनावों पर कर्नाटक उपचुनाव का असर पड़ेगा। ऐसे में मिली जीत गठबंधन के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

एक-दूसरे के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश 
वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भी पार्टियां एक-दूसरे के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश में थीं। बीजेपी की कोशिश थी कि मई में 224 में से 104 सीटें विधानसभा चुनाव में जीतने के बाद उपचुनाव जीतकर वह अपनी ताकत बढ़ाए लेकिन रामनगर और जामखंडी में कांग्रेस-जेडीएस के जीतने से उसकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। हालांकि, रामनगर पहले से ही जेडीएस का गढ़ है जहां से कुमारस्वामी ने जीत दर्ज की थी और अब उनकी पत्नी अनीता ने उसे बरकरार रखा है। ऐसे में बीजेपी का यहां जीतना चमत्कार ही होता लेकिन चुनाव से एक दिन पहले बीजेपी प्रत्याशी के पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने से पार्टी को बड़ा झटका लग गया।

Sunday, November 4, 2018

डायमंड इंडस्ट्री का 'हीरा' आत्महत्या क्यों कर रहा है?

बीते 25 अक्टूबर को गुजरात के सूरत में हरिकृष्ण डायमंड कंपनी के मालिक ने 600 कर्मचारियों को दिवाली बोनस में गाड़ी गिफ़्ट की.

हीरा कारोबारी सावजी ढोलकिया हर दिवाली पर अपने कर्मचारियों को महंगे गिफ़्ट देते हैं. इसके लिए एक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए.

तभी से पूरे देश में सूरत का हीरा कारोबार चर्चा में है और इस कारोबार की आभासी छवि एक बार फिर देश के सामने है.

इसे आभासी छवि इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि विश्व के 42 प्रतिशत हीरों की पोलिशिंग का काम जहां होती है, वहां हीरा कारोबार की सच्चाई कुछ अलग ही है.

पिछले 20 दिनों में गुजरात के हीरा कारोबार में काम कर रहे 10 मजदूरों ने खुदकुशी की है. दूसरी ओर कई डायमंड यूनिट में से मज़दूरों को काम से निकाल दिया गया है.

गुजरात डायमंड वर्कर्स यूनियन (जीडीडब्ल्यूयू) नामक मज़दूर संगठन दावा है कि गुजरात में पिछले 20 दिनों में 10 से ज़्यादा मज़दूरों ने खुदकुशी की है.

गुजरात के स्थानीय मीडिया जैसे 'गुजरात समाचार', 'संदेश' और अन्य स्थानीय अख़बारों में प्रकाशित ख़बरों से पता चलता है कि सूरत के पुणा, वराछा, मानदरवाजा, कतारगाम और अमरौली में मज़दूरों ने आत्महत्या की है.

इसके अलावा भावनगर के घोघा, पालीताणा और राजकोट के जसदण में भी मज़दूरों ने आत्महत्या की है, और अन्य शहरों में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है.

हज़ारों मज़दूरो को काम से निकाला
डायमंड इंडस्ट्री में काम करने वाले मज़दूर और मज़दूर संगठन के नेता कहते हैं कि बड़े पैमाने पर मज़दूरों को काम से निकाला जा रहा है और कारखाने बंद हो रहे हैं.

पाँचवीं पास ढोलकिया बोनस में देते हैं कार-फ्लैट
ये दीवाली छप्परफाड़, गिफ़्ट में घर और कार
सूरत रत्नकलाकार विकास संघ के जयसुख गजेरा का कहना है कि पिछले एक महीने में सूरत के हीरा कारोबार में 15 से 20 हज़ार मज़दूरों को काम से निकाला गया है. इनमें से अधिकतर जगहों पर मज़दूरों को पीएफ़ इत्यादी अधिकार नहीं मिलते.

गुजरात डायमंड वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष रणमल जिलरिया कहते हैं की यह स्थिति पूरे गुजरात में है. सूरत के अलावा भावनगर और राजकोट में भी मज़दूर का हाल बेहाल है.

रणमल ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "सूरत के वराछा में किरण एक्सपोर्ट में 300 मज़दूरों को काम से निकाल दिया गया है. दिवाली के वक़्त मज़दूर बेरोजगार हो गए हैं"

'बेरोज़गारी के कारण भाई ने आत्महत्या की'
भावनगर के हीरा कारोबार के मज़दूर विक्रम मकवाना ने 11 अक्टूबर को आत्महत्या की थी. 32 साल के विक्रम हीरे के यूनिट में काम कर रहे थे, लेकिन दो-तीन महीनों से बेरोज़गार थे.

उनके छोटे भाई जगदीश मकवाना ने बीबीसी को बताया, "मैं अहमदाबाद गया हुआ था, तब मेरे दोस्त का मुझे फोन आया और बताया कि भाई ने केरोसिन डाल कर खुद को आग लगा ली है"

"मेरे दोस्त ने मेरे भाई को जलते हुए देखा था, वो ही उसे अस्पताल ले गया. लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया."