Monday, December 31, 2018

बुमराह-शमी-ईशांत: ये हैं वर्ल्ड क्रिकेट का नंबर वन तूफ़ान

मेलबर्न टेस्ट में भारत की ज़ोरदार जीत के साथ बहुत कुछ ऐसा हुआ है जो इससे पहले भारतीय क्रिकेट में कभी नहीं हुआ था.

पहली बार भारत बाक्सिंग डे पर शुरू हुए टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को हराने में कामयाब रहा. भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलियाई जमीं पर एक सिरीज़ में दो टेस्ट मैचों में जीत हासिल की है.

टेस्ट मैचों में भारत की 150वीं जीत, व्यक्तिगत रिकॉर्ड के मामले में जसप्रीत बुमराह, ऋषभ पंत और विराट कोहली के लिए भी बेहद ख़ास साबित हुई. अभी इस सिरीज़ का फ़ैसला होना है लेकिन मेलबर्न में जीत के साथ ये साफ़ हो चुका है कि भारत यहां से सिरीज़ हारेगा नहीं.

लेकिन ये सिरीज़ भारतीय क्रिकेट में केवल इन रिकॉर्ड्स के लिए नहीं याद की जाएगी. ये सिरीज़ या कहें पूरा साल ही टेस्ट क्रिकेट में भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों का साल साबित हुआ है. मेलबर्न में भारत की जीत की हीरो भले जसप्रीत बुमराह रहे हों लेकिन ये भी देखना होगा कि मोहम्मद शमी और ईशांत शर्मा के साथ ने उनकी गेंदबाज़ी को कहीं ज्यादा मारक बना दिया.

तिकड़ी ने तोड़ा 34 साल पुराना रिकॉर्ड
जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और ईशांत शर्मा केवल इस सिरीज़ के हीरो नहीं रहे हैं बल्कि आप 2018 के पूरे साल में इनका प्रदर्शन देख लीजिए- जसप्रीत बुमराह ने नौ टेस्ट में इस साल 48 विकेट लिए हैं, इकॉनमी महज 2.65 रही है, वहीं मोहम्मद शमी ने 12 टेस्ट मैचों में 47 विकेट चटकाए जबकि इन दोनों से कहीं ज़यादा अनुभवी ईशांत शर्मा ने 11 टेस्ट मैचों में 41 विकेट चटकाए हैं.

यानी इन तीनों गेंदबाज़ ने इस साल 136 टेस्ट विकेट चटकाए. टेस्ट क्रिकेट में इससे पहले तेज़ गेंदबाज़ों की तिकड़ी का ऐसा ख़ौफ़ पहले कभी नहीं देखा गया, कम से कम भारतीय गेंदबाज़ों के लिए ये सपने सरीखा था.

अब इसकी अहमयित समझनी हो तो साल 1984 में जाना होगा, जब वेस्टइंडीज़ के गेंदबाज़ जोएल गॉरनर, माइकल होल्डिंग और मैल्कम मार्शल का जलवा पूरी दुनिया में छाया था. इन तीनों गेंदबाज़ ने 1984 में 130 विकेट चटकाए थे. उनके इस रिकॉर्ड के करीब 2008 में दक्षिण अफ्रीका के मॉर्नी मोर्कल, मखाया एनटिनी और डेल स्टेन ही पुहंच पाए थे, तब इन तीनों ने एक साल में 123 विकेट हासिल किए थे.

क्रिकेट: गेंद से भी तेज़ हैं गालियों की रफ़्तार
जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और ईशांत शर्मा के इस साल के प्रदर्शन ने इन दिग्गज गेंदबाज़ों को पीछे छोड़ दिया है. भारतीय क्रिकेट में इन गेंदबाज़ों के योगदान के बारे में मेलबर्न टेस्ट में जीत के बाद विराट कोहली ने जो कहा वो भी ध्यान देने लायक है. कोहली ने कहा, "गेंदबाज़ों की मीटिंग में मैं चुपचाप बैठा रहता हूं और सुनता रहता हूं."

कोहली ने ये भी कहा है कि इन मीटिंग को 'हमारे गेंदबाज़ डिक्टेट करते रहते हैं और वे बताते हैं कि हम किस तरह से टेस्ट मैच जीत सकते हैं और इस साल के नतीजे में आप ये सब देख सकते हैं.'

इंडिया के सुपर सिक्स
भारतीय गेंदबाज़ों और वो भी तेज़ गेंदबाज़ों की ऐसी हैसियत होगी, ये शायद ही किसी ने सोचा होगा. वैसे इस वक्त भारतीय क्रिकेट के पास केवल जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और ईशांत शर्मा भर नहीं हैं. इन तीनों को बराबरी का टक्कर देने वाले उमेश यादव और भुवनेश्वर कुमार भी मौजूद हैं. इनके अलावा मिले मौकों पर गति के मामले में हार्दिक पांड्या भी इनसे होड़ लेते नज़र आते हैं.

यानी इस समय में कम से कम छह गेंदबाज़ हैं, जो एक दूसरे को रिप्लेस करने का दमखम रखते हैं. इसलिए दुनिया भर के क्रिकेट विश्लेषक भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों के आक्रमण को सर्वश्रेष्ठ बता रहे हैं. 2018 में औसत स्पीड के लिहाज से भी भारतीय गेंदबाज़ नंबर एक साबित हुए हैं, भारत के गेंदबाज़ों ने पूरे साल 136 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से कहीं तेज़ गेंदबाज़ी की है.

इसे आप भारतीय क्रिकेट का सबसे सुनहरा दौर कह सकते हैं. नहीं तो 1932 में टेस्ट क्रिकेट में शुरुआत करने के बाद भी भारतीय टेस्ट टीम मैच जिताने वाले तेज़ गेंदबाज़ों का रोना रोती रही थी. 1932 में भारत के पहले टेस्ट मैच में मोहम्मद निसार के रूप में भारत को तेज़ गेंदबाज़ ज़रूर मिला था, लेकिन जो महज छह टेस्ट मैच खेल पाए.

Wednesday, December 26, 2018

Stree के बाद Made in China में राजकुमार, इस द‍िन होगी र‍िलीज

Rajkummar Rao और मौनी रॉय अभिनीत Made in China पहले 15 अगस्त को रिलीज होने जा रही थी. लेकिन अब फिल्म की रिलीज डेट को शिफ्ट कर दिया गया है. खबरों के मुताबिक र‍िलीज की तारीख बदलते हुए अब यह फिल्म एक्टर राजकुमार राव के जन्मदिन से एक दिन पहले यानी 30 अगस्त, 2019 को रिलीज होगी. 'स्त्री' फेम एक्टर का जन्मदिन 31 अगस्त को होता है.

हालांकि फिल्म की र‍िलीज डेट को 30 अगस्त क्यों रखा गया है इसका खुलासा नहीं हुआ है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि राजकुमार की इस साल की हिट फिल्म 'स्त्री' भी इसी (31 अगस्त, 2018) के आसपास ही रिलीज हुई थी."वैसे 'मेड इन चाइना' मिखिल मुसले द्वारा निर्देशित है और यह मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले दिनेश विजान द्वारा निर्मित है.बताते चलें कि राजकुमार के लिए 2018 का साल बहुत बेहतरीन साबित हुआ है.

क्या है फिल्म की कहानी?

फिल्म में राजकुमार एक संघर्षरत गुजराती व्यवसायी के रूप में दिखेंगे और मौनी उनकी पत्नी के किरदार में दिखेंगी. गुजराती निर्देशक मिखिल मुसले की यह पहली बॉलीवुड फिल्म है. वर्ष 2016 की उनकी गुजराती थ्रिलर-फिल्म 'रॉन्ग साइड राजू' को सर्वश्रेष्ठ गुजराती फीचर फिल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

बता दें राजकुमार राव के ल‍िए साल 2018 सफलता के नए आयाम लेकर आया है. उनकी कई फिल्मों ने बॉक्स ऑफ‍िस पर शानदार प्रदर्शन किया. इनमें न्यूटन, स्त्री जैसी फिल्में शामिल हैं. साल 2019 में राजकुमार राव सोनम कपूर के साथ फिल्म एक लड़की को देखा... में नजर आने वाले हैं.

कैशबैक के अलावा फ्लिपकार्ट पर एक्स्चेंज ऑफर भी चल रहा है यानी इस स्मार्टफोन को खरीदने के लिए अगर आप पुराना स्मार्टफोन वापस करेंगे तो स्मार्टफोन की वैल्यू के हिसाब से उतने पैसे वापस कर दिए जाएंगे.

फोटॉग्रफी के लिए इसमें 48 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा है. कंपनी ने इसमें SONY IMX 586 सेंसर यूज किया है जिसके तहत पिक्सल बाइनिंग टेक्नॉलजी से चार 0.8 माइक्रॉन पिक्सल को मिला कर लार्ज 1.6 माइक्रॉन पिक्सल दिया जाएगा. इसमें दिए गए चिपसेट की वजहे से 48 मेगापिक्सल AI HDR मोड मिलेगा जिससे हाई डेफिनिशन इमेज क्रिएट होंगी.

इस स्मार्टफोन में 4,000mAh की बैटरी दी गई है और कंपनी के मुताबिक ये स्मार्टफोन सुपर फास्ट चार्ज टेक्नॉलजी सपोर्ट करती है. इसमें Android Pie बेस्ड Magic UI 2.0 दिया गया है. हालांकि इसके ग्लोबल वर्जन में EMUI 9.0 दिया जाएगा.

कंपनी ने इसके साथ लिंक टर्बो फीचर दिया है. इसके जरिए बेहतर नेटवर्क स्पीड को देखते हुआ आपका स्मार्टफोन वाईफाई से LTE और LTE से वाईफाई में कनेक्ट होगा. ये फीचर स्मार्टफोन में दिए AI के तहत काम करता है और यूजर बिहेवियर को समझते हुए नेटवर्क चेंज करता है. यानी अगर मोबाइल इंटरनेट फास्ट है और वाईफाई स्लो तो ऐसे में ये स्विच करके LTE मे चला जाएगा. ये कंपनी का दावा है.

Sunday, December 16, 2018

सऊदी अरब में लोग क्यों सजाते हैं फूलों का ताज

सऊदी अरब और अरब प्रायद्वीप के दूसरे हिस्सों से आए सैलानी हरे-भरे पहाड़ों पर पहुंचते हैं तो सेल्फी लेने की उनकी इच्छा जग जाती है.

ठंडी हवा के झोंके के बीच से उनकी गाड़ियां गुजरती हैं तो वे खुद को रोक नहीं पाते. कैमरे बाहर निकल आते हैं.

शहद, फल और रंग-बिरंगे फूलों से बने ताज बेचने वाले स्टॉल पर उनकी गाड़ियां रुकती हैं. फ्लैश चमकते हैं और सोशल मीडिया के लिए फूलों वाले ताज के साथ उनकी मुस्कुराती तस्वीरें कैमरे में क़ैद हो जाती हैं.

सऊदी अरब के असिर प्रांत में बिकने वाले फूलों के ताज सिर्फ़ अमीर सैलानियों को लुभाने के लिए नहीं हैं. बारीकी से बुने जाने वाले फूलों के ये मुकुट सऊदी अरब के "फ़्लावर मेन" के पारंपरिक परिधान हैं.

क़हटन कबीले के लोग सुंदरता और सेहत दोनों के लिए फूलों और पत्तियों को सिर पर सजाने की परंपरा निभाते हैं. अब वे इस परंपरागत ताज को यहां आने वाले सैलानियों को बेचते भी हैं.

खूबसूरती की दोस्ताना प्रतियोगिता
कबीले के मर्द परंपरागत रूप से सिर पर जड़ी-बूटियों, फूलों और घासों का ताज सजाते हैं. उनके उपनाम भी फूलों से जुड़े होते हैं.

दिवंगत शोधकर्ता थियरी मॉगर के मुताबिक कबीले के युवा सदस्य खूबसूरती की दोस्ताना प्रतियोगिता में ये ताज बनाते हैं. वे जितना हो सके उतने रंगीन फूल (गेंदे, मोगरा वगैरह) का इस्तेमाल करते हैं.

प्रौढ़ मर्दों के ताज में फीकापन झलकता है. रंगीन फूलों की जगह वे जंगली तुलसी की हरी पत्तियों का इस्तेमाल करते हैं.

सुंदर दिखने के लिए कुछ लोग इसे रोज पहनते हैं तो कुछ लोग सिर्फ़ ख़ास मौकों जैसे प्रमुख इस्लामिक छुट्टियों के दिन.

कुछ लोग बीमार हो जाने पर भी इनको पहनते हैं. बीमारी में वे जड़ी-बूटियों और इलाज के काम आने वाली पत्तियों का इस्तेमाल करते हैं.

इस कबीले की परंपरा सऊदी अरब में दबदबा रखने वाले शासक वर्ग की संस्कृति से अलग है. लेकिन इसकी वजह सिर्फ़ फूलों के ताज नहीं हैं.

शासक वर्ग के लोग नज्द और हिजाज़ क्षेत्रों से आते हैं. फूलों वाले लोगों का मूल इलाका असिर पठार के ऊपर है. यहां सऊदी साम्राज्य के किसी भी दूसरे इलाके से ज्यादा बारिश होती है.

मई और जून में जब देश के शहरों में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है, तब राजधानी रियाद से करीब 900 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में बसा असिर ठंडी हवाओं और कभी-कभी होने वाली तूफानी बारिश से सैलानियों का स्वागत करता है.

Monday, December 10, 2018

जीतू फौजी बोला- बलवाइयों के बीच फंस गया था, गोली नहीं चलाई

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में 3 दिसंबर को हुई हिंसा के पीछे के कारणों को जानने के लिए पुलिस मशक्कत कर रही है. हिंसा के आरोपी जितेंद्र उर्फ जीतू फौजी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में है. इस दौरान उसने पुलिस को बताया कि हिंसा के वक्त वह गढ़मुक्तेश्वर-बुलंदशहर रुट पर बवाल होने की वजह से वो बलवाइयों के बीच फंस गया था और तभी किसी ने वीडियो बनाया.

बता दें कि मेरठ एडीजी प्रशांत कुमार के मुताबिक, अगर जरूरत पड़ती है तो जीतू की रिमांड के लिए कोर्ट में भी एप्लिकेशन दी जाएगी. हालांकि, जीतू के वकील भी उसे जमानत दिलवाने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं.

कोर्ट में होने वाली पेशी से पहले यूपी पुलिस ने जीतू से करीब 500 सवाल पूछे, एसआईटी-एसटीएफ ने अलग-अलग करीब 10 घंटे जीतू से पूछताछ भी की.

CDR में जीतू के मोबाइल की लोकेशन घटनास्थल पर भी मिली है, यही कारण है कि मोबाइल की फोरेंसिक जांच होगी. इस दौरान जीतू के मोबाइल के डेटा का पता लगाया जाएगा.

आपको बता दें कि बुलंदशहर में हुई हिंसा में पुलिस ने कुल 87 लोगों पर केस दर्ज किया है. इनमें 27 नामजद और 60 अज्ञात हैं. गौरतलब है कि जीतू ने इससे पहले भी एसटीएफ को बताया था, वह उस दौरान भीड़ में मौजूद था लेकिन उसने गोली नहीं चलाई थी.

दरअसल, 3 दिसंबर को बुलंदशहर में गोकशी विवाद से भड़की हिंसा में भीड़ ने यूपी पुलिस के इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी थी. उस हिंसक भीड़ में जम्मू-कश्मीर के सोपोर में तैनात 22 राजपूताना राइफल्स का जवान जितेंद्र मलिक उर्फ जीतू फौजी भी शामिल था. पुलिस ने फौजी के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की थी.

हिंसा के बाद गिरफ्तार लोगों से पूछताछ और हिंसा के वीडियो खंगालने के बाद पुलिस को शक हुआ कि गोली शायद जीतू फौजी ने ही चलाई थी.

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के एक निजी होटल में ईवीएम मशीन और सागर जिले में बिना नंबर की स्कूल बस से स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम पहुंचाए जाने का वीडियो जारी करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि बीजेपी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जनादेश को पटलने की कोशिश कर रही है. वहीं, एक अन्य मामले में शुक्रवार को ही मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगभग एक घंटे के लिए बिजली नहीं होने की वजह से स्ट्रॉन्ग रूम का सीसीटीवी और एलईडी डिस्प्ले इस अवधि में काम नहीं कर पाया.

इन शिकायतों पर चुनाव आयोग ने भी माना है कि मध्य प्रदेश में ऐसी दो घटनाएं हुईं थीं जिसमें ईवीएम को लेकर नियमावली का पालन नहीं किया गया. लेकिन आयोग का कहना था कि यह गलती प्रक्रिया तक ही सीमित है और मशीनों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई. लेकिन आयोग ने एक अधिकारी को मशीने देरी से जमा कराने के आरोप में सस्पेंड कर दिया.

Tuesday, December 4, 2018

फ़्रांस सरकार ने वापस लिया तेल पर टैक्स बढ़ाने का फ़ैसला

फ़्रांस की स्थानीय मीडिया के मुताबिक़, फ़्रांसीसी सरकार ने मंगलवार को तेल पर टैक्स बढ़ाने से जुड़ा हुआ अपना फ़ैसला वापस लेने का ऐलान कर दिया है.

फ़्रांसीसी प्रधानमंत्री एडुआर्डो फिलिप्पे मंगलवार को ही तेल पर टैक्स बढ़ाने से जुड़े फ़ैसले का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों से मुलाक़ात करने वाले थे. लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इस बातचीत से हाथ खींच लिए.

'येलो वेस्ट' या पीली शर्ट नाम के इस समूह के कुछ सदस्यों का कहना है कि उन्हें दूसरे कट्टर प्रदर्शनकारियों ने जाने से मारने की धमकी देते हुए सरकार के साथ बातचीत से दूर रहने के लिए कहा था.

पेट्रोल-डीज़ल पर एक विवादास्पद टैक्स को लेकर फ़्रांस में नवंबर से देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं.

पर पिछले कुछ दिनों से इस विरोध ने काफ़ी आक्रामक रूप ले लिया है जिसमें अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है और काफ़ी तोड़-फोड़ हुई है.

फ़्रांस के वित्त मंत्री ब्रुनो ले मायर ने पिछले हफ्ते बिजनेस में होने वाले नुकसान की जानकारी के लिए बिजनेस प्रतिनिधियों से बात की. मायर का कहना है कि सरकार सार्वजनिक ख़र्चों में कटौती के लिए प्रतिबद्ध है.

विरोध रोकने के संकेत
विरोध प्रदर्शन सोमवार को भी देखे गए. लगभग 50 प्रदर्शकारियों ने मार्से शहर के पास एक बंदरगाह के प्रमुख ईंधन डिपो को ब्लॉक कर दिया था जिसके वजह से देश के अन्य पेट्रोल पंप पर इसका असर दिखा.

देश भर में लगभग 100 माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों ने शैक्षणिक और परीक्षा में होने वाले रिफॉर्म के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.

साथ ही सोमवार को प्राइवेट एंबुलेंस के ड्राइवर ने सोशल सिक्योरिटी और हेल्थकेयर में सुधार की एक श्रृंखला के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए, जिनका कहना था कि इसकी वजह से उनकी सेवा प्रभावित हो सकती है.

फ़्रांस में पेट्रोल-डीज़ल पर लगने वाले टैक्स में हुई बढ़ोत्तरी से आम लोगों में काफी नाराज़गी है. जिसके चलते लोग सड़कों पर उतर आए हैं.

फ़्रांस में डीज़ल कारों में इस्तेमाल होने वाला सबसे प्रमुख ईंधन है. पिछले 12 महीनों में डीज़ल की क़ीमत में 23 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है. मैक्रों सरकार ने इस साल प्रति लीटर डीज़ल पर 7.6 फ़ीसदी हाइड्रोकार्बन टैक्स लगा दिया था.

Sunday, November 18, 2018

निरंकारी भवन पर हमला, तीन की मौत

पंजाब पुलिस के मुताबिक रविवार को अमृतसर के पास एक निरंकारी भवन पर हुए एक हमले में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई है जबकि 19 घायल हैं.

अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर ने बीबीसी से इसकी पुष्टि की है.

अमृतसर सीमा रेंज के आईजी सुरिंदर पाल परमार ने बीबीसी के सहयोगी रविंदर सिंह रोबिन को बताया है कि ये एक ग्रेनेड हमला हो सकता है.

चश्मदीदों ने बताया है कि दो युवक निरंकारी भवन के पास पहुंचे और उन्होंने वहां गेट पर खड़ी एक लड़की को पिस्टल दिखाई और विस्फोटक सामग्री फेंक दी.

बताया जा रहा है कि दोनों अज्ञात हमलावर बाइक पर सवार थे.

क्दिवासियों के हिन्दूकरण' से जीत रही बीजेपी?
सिर पर तलवार के वार से मारी गई थीं रानी लक्ष्मीबाई
असली 'ठग्स ऑफ़ हिंदुस्तान' जिनसे डरते थे अंग्रेज़
फिर पाकिस्तान पर क्यों भड़के डोनल्ड ट्रंप?
निरंकारी भवन में हर रविवार सतसंग होता है, धमाके के वक्त भी सतसंग चल रहा था जिस वजह से मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.

एक चश्मदीद ने बीबीसी को बताया, "दोनों ही हमलावर पंजाबी बोल रहे थे. उन्होंने मुंह और सर पर कपड़ा बांधा हुआ था. उन्होंने हमला करने के दौरान किसी तरह का कोई नारा नहीं लगाया."

जालंधर में छावनी इलाक़े में धमाका
पुलिस ने कहा है कि वे इस धमाके की जांच कर रहे हैं और फ़िलहाल इसे चरमपंथी हमले से जोड़ना जल्दबाज़ी होगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पंजाब में पहले से ही अलर्ट घोषित किया गया था क्योंकि ऐसी खबरें थीं कि चरमपंथी समूह जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 5 या 6 लोग पंजाब के फ़िरोज़पुर इलाके़ में हो सकते हैं.

वहीं अमृतसर के ज़िलाधिकारी कुलदीप सिंह रंधावा ने कहा, "अभी ये नहीं कहा जा सकता है कि कौन इसके पीछे है. अभी तक की जांच से सीमापार से किसी का हाथ होने विस्तृत जांच के बाद ही कुछ ठोस आधार पर कहा जा सकता है."

पहले से मिले इंटेलिजेंस इनपुट के सवाल पर रंधावा ने कहा, "जो इंटेलिजेंस इनपुट मिले थे वो इससे अलग तरह के थे."

अकाली दल के नेता विरसा सिंह वल्तोहा ने कहा कि यह हमला दिखाता है कि राज्य में हाई अलर्ट होने के बावजूद सरकार गंभीर नहीं है और इस तरह के धमाके हो रहे हैं.

Tuesday, November 6, 2018

और मजबूत होगा कांग्रेस-जेडी (एस) गठबंधन, बीजेपी को झटका

कर्नाटक की 3 लोकसभा सीटों और 2 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं। कांग्रेस-जेडी (एस) गठबंधन मजबूत होकर उभरा है जबकि बीजेपी की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कर्नाटक के साथ ही चुनाव में जाने वाले दूसरे राज्यों और 2019 लोकसभा चुनावों पर इन नतीजों का क्या असर होगा।

कर्नाटक की 3 लोकसभा और 2 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों में कांग्रेस-जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। दो विधानसभा और 2 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज कर गठबंधन ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को तगड़ा झटका दिया है, जो इन चुनावों के जरिए कर्नाटक विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव, दोनों पर निशाना लगाने की तैयारी में थी। बीजेपी के हाथ केवल शिमोगा लोकसभा सीट आई है जबकि कांग्रेस-जेडी (एस) गठबंधन ने मांड्या और बेल्लारी लोकसभा सीटें अपने नाम की हैं। वहीं, रामनगर और जामखंडी विधानसभा सीट भी गठबंधन के खाते में गई हैं। इसी के साथ बीजेपी की विधानसभा में ताकत बढ़ाने की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। 

आपको बता दें कि जिन पांच सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आए हैं, उनमें चार सीटें इस्तीफे की वजह से और एक सीट विधायक के निधन की वजह से खाली हुई थी। शिमोगा लोकसभा सीट बीएस येदियुरप्पा (बीजेपी), बेल्लारी लोकसभा सीट श्रीमुलु (बीजेपी) और मांड्या संसदीय सीट सीएस पुट्टाराजू (कांग्रेस) के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। वहीं रामनगर सीट से सीएम कुमारस्वामी (कांग्रेस) के इस्तीफे और जामखंडी सीट कांग्रेस विधायक सिद्धू न्यामगौड़ा (कांग्रेस) के निधन के बाद खाली हुई थी। अब नतीजों के बाद बेल्लारी और मांड्या कांग्रेस के खाते में गई तो बीजेपी को सिर्फ शिमोगा से संतोष करना पड़ा। बाकी दो विधानसभा सीटों पर भी कांग्रेस को ही जीत मिली। कुल मिलाकर बीजेपी को एक लोकसभा सीट का नुकसान उठाना पड़ा। 

5 राज्यों के विधानसभा चुनाव पर भी नतीजे का असर! 
इन उपचुनावों पर सभी की निगाहें इसलिए टिकी थीं क्योंकि इनके नतीजों का असर कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन पर भी पड़ेगा। मई में हुए चुनावों के दौरान दोनों पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ लड़ी थीं लेकिन नतीजे आने के बाद गठबंधन कर लिया था। पांच सीटों में कांग्रेस ने जामखंडी और बेल्लारी और जेडीएस ने शिमोगा, रामनगर और मांड्या में प्रत्याशी उतारे। ऐसे में 2019 चुनाव से पहले गठबंधन की ताकत, आपसी तालमेल और जनता पर असर की परख इन चुनावों में देखने को मिली। गठबंधन के प्रदर्शन बीजेपी के लिए मुश्किल हालात पैदा हो गए हैं।

दूसरे राज्यों पर असर
इन नतीजों से गठबंधन की राजनीति को ताकत मिलने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं और अगले साल लोकसभा चुनाव होंगे। कांग्रेस-जेडी(एस) का पहले से ही मानना है कि इन राज्यों के चुनावों पर कर्नाटक उपचुनाव का असर पड़ेगा। ऐसे में मिली जीत गठबंधन के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

एक-दूसरे के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश 
वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भी पार्टियां एक-दूसरे के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश में थीं। बीजेपी की कोशिश थी कि मई में 224 में से 104 सीटें विधानसभा चुनाव में जीतने के बाद उपचुनाव जीतकर वह अपनी ताकत बढ़ाए लेकिन रामनगर और जामखंडी में कांग्रेस-जेडीएस के जीतने से उसकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। हालांकि, रामनगर पहले से ही जेडीएस का गढ़ है जहां से कुमारस्वामी ने जीत दर्ज की थी और अब उनकी पत्नी अनीता ने उसे बरकरार रखा है। ऐसे में बीजेपी का यहां जीतना चमत्कार ही होता लेकिन चुनाव से एक दिन पहले बीजेपी प्रत्याशी के पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने से पार्टी को बड़ा झटका लग गया।

Sunday, November 4, 2018

डायमंड इंडस्ट्री का 'हीरा' आत्महत्या क्यों कर रहा है?

बीते 25 अक्टूबर को गुजरात के सूरत में हरिकृष्ण डायमंड कंपनी के मालिक ने 600 कर्मचारियों को दिवाली बोनस में गाड़ी गिफ़्ट की.

हीरा कारोबारी सावजी ढोलकिया हर दिवाली पर अपने कर्मचारियों को महंगे गिफ़्ट देते हैं. इसके लिए एक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए.

तभी से पूरे देश में सूरत का हीरा कारोबार चर्चा में है और इस कारोबार की आभासी छवि एक बार फिर देश के सामने है.

इसे आभासी छवि इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि विश्व के 42 प्रतिशत हीरों की पोलिशिंग का काम जहां होती है, वहां हीरा कारोबार की सच्चाई कुछ अलग ही है.

पिछले 20 दिनों में गुजरात के हीरा कारोबार में काम कर रहे 10 मजदूरों ने खुदकुशी की है. दूसरी ओर कई डायमंड यूनिट में से मज़दूरों को काम से निकाल दिया गया है.

गुजरात डायमंड वर्कर्स यूनियन (जीडीडब्ल्यूयू) नामक मज़दूर संगठन दावा है कि गुजरात में पिछले 20 दिनों में 10 से ज़्यादा मज़दूरों ने खुदकुशी की है.

गुजरात के स्थानीय मीडिया जैसे 'गुजरात समाचार', 'संदेश' और अन्य स्थानीय अख़बारों में प्रकाशित ख़बरों से पता चलता है कि सूरत के पुणा, वराछा, मानदरवाजा, कतारगाम और अमरौली में मज़दूरों ने आत्महत्या की है.

इसके अलावा भावनगर के घोघा, पालीताणा और राजकोट के जसदण में भी मज़दूरों ने आत्महत्या की है, और अन्य शहरों में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है.

हज़ारों मज़दूरो को काम से निकाला
डायमंड इंडस्ट्री में काम करने वाले मज़दूर और मज़दूर संगठन के नेता कहते हैं कि बड़े पैमाने पर मज़दूरों को काम से निकाला जा रहा है और कारखाने बंद हो रहे हैं.

पाँचवीं पास ढोलकिया बोनस में देते हैं कार-फ्लैट
ये दीवाली छप्परफाड़, गिफ़्ट में घर और कार
सूरत रत्नकलाकार विकास संघ के जयसुख गजेरा का कहना है कि पिछले एक महीने में सूरत के हीरा कारोबार में 15 से 20 हज़ार मज़दूरों को काम से निकाला गया है. इनमें से अधिकतर जगहों पर मज़दूरों को पीएफ़ इत्यादी अधिकार नहीं मिलते.

गुजरात डायमंड वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष रणमल जिलरिया कहते हैं की यह स्थिति पूरे गुजरात में है. सूरत के अलावा भावनगर और राजकोट में भी मज़दूर का हाल बेहाल है.

रणमल ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "सूरत के वराछा में किरण एक्सपोर्ट में 300 मज़दूरों को काम से निकाल दिया गया है. दिवाली के वक़्त मज़दूर बेरोजगार हो गए हैं"

'बेरोज़गारी के कारण भाई ने आत्महत्या की'
भावनगर के हीरा कारोबार के मज़दूर विक्रम मकवाना ने 11 अक्टूबर को आत्महत्या की थी. 32 साल के विक्रम हीरे के यूनिट में काम कर रहे थे, लेकिन दो-तीन महीनों से बेरोज़गार थे.

उनके छोटे भाई जगदीश मकवाना ने बीबीसी को बताया, "मैं अहमदाबाद गया हुआ था, तब मेरे दोस्त का मुझे फोन आया और बताया कि भाई ने केरोसिन डाल कर खुद को आग लगा ली है"

"मेरे दोस्त ने मेरे भाई को जलते हुए देखा था, वो ही उसे अस्पताल ले गया. लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया."