Monday, December 31, 2018

बुमराह-शमी-ईशांत: ये हैं वर्ल्ड क्रिकेट का नंबर वन तूफ़ान

मेलबर्न टेस्ट में भारत की ज़ोरदार जीत के साथ बहुत कुछ ऐसा हुआ है जो इससे पहले भारतीय क्रिकेट में कभी नहीं हुआ था.

पहली बार भारत बाक्सिंग डे पर शुरू हुए टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को हराने में कामयाब रहा. भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलियाई जमीं पर एक सिरीज़ में दो टेस्ट मैचों में जीत हासिल की है.

टेस्ट मैचों में भारत की 150वीं जीत, व्यक्तिगत रिकॉर्ड के मामले में जसप्रीत बुमराह, ऋषभ पंत और विराट कोहली के लिए भी बेहद ख़ास साबित हुई. अभी इस सिरीज़ का फ़ैसला होना है लेकिन मेलबर्न में जीत के साथ ये साफ़ हो चुका है कि भारत यहां से सिरीज़ हारेगा नहीं.

लेकिन ये सिरीज़ भारतीय क्रिकेट में केवल इन रिकॉर्ड्स के लिए नहीं याद की जाएगी. ये सिरीज़ या कहें पूरा साल ही टेस्ट क्रिकेट में भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों का साल साबित हुआ है. मेलबर्न में भारत की जीत की हीरो भले जसप्रीत बुमराह रहे हों लेकिन ये भी देखना होगा कि मोहम्मद शमी और ईशांत शर्मा के साथ ने उनकी गेंदबाज़ी को कहीं ज्यादा मारक बना दिया.

तिकड़ी ने तोड़ा 34 साल पुराना रिकॉर्ड
जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और ईशांत शर्मा केवल इस सिरीज़ के हीरो नहीं रहे हैं बल्कि आप 2018 के पूरे साल में इनका प्रदर्शन देख लीजिए- जसप्रीत बुमराह ने नौ टेस्ट में इस साल 48 विकेट लिए हैं, इकॉनमी महज 2.65 रही है, वहीं मोहम्मद शमी ने 12 टेस्ट मैचों में 47 विकेट चटकाए जबकि इन दोनों से कहीं ज़यादा अनुभवी ईशांत शर्मा ने 11 टेस्ट मैचों में 41 विकेट चटकाए हैं.

यानी इन तीनों गेंदबाज़ ने इस साल 136 टेस्ट विकेट चटकाए. टेस्ट क्रिकेट में इससे पहले तेज़ गेंदबाज़ों की तिकड़ी का ऐसा ख़ौफ़ पहले कभी नहीं देखा गया, कम से कम भारतीय गेंदबाज़ों के लिए ये सपने सरीखा था.

अब इसकी अहमयित समझनी हो तो साल 1984 में जाना होगा, जब वेस्टइंडीज़ के गेंदबाज़ जोएल गॉरनर, माइकल होल्डिंग और मैल्कम मार्शल का जलवा पूरी दुनिया में छाया था. इन तीनों गेंदबाज़ ने 1984 में 130 विकेट चटकाए थे. उनके इस रिकॉर्ड के करीब 2008 में दक्षिण अफ्रीका के मॉर्नी मोर्कल, मखाया एनटिनी और डेल स्टेन ही पुहंच पाए थे, तब इन तीनों ने एक साल में 123 विकेट हासिल किए थे.

क्रिकेट: गेंद से भी तेज़ हैं गालियों की रफ़्तार
जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और ईशांत शर्मा के इस साल के प्रदर्शन ने इन दिग्गज गेंदबाज़ों को पीछे छोड़ दिया है. भारतीय क्रिकेट में इन गेंदबाज़ों के योगदान के बारे में मेलबर्न टेस्ट में जीत के बाद विराट कोहली ने जो कहा वो भी ध्यान देने लायक है. कोहली ने कहा, "गेंदबाज़ों की मीटिंग में मैं चुपचाप बैठा रहता हूं और सुनता रहता हूं."

कोहली ने ये भी कहा है कि इन मीटिंग को 'हमारे गेंदबाज़ डिक्टेट करते रहते हैं और वे बताते हैं कि हम किस तरह से टेस्ट मैच जीत सकते हैं और इस साल के नतीजे में आप ये सब देख सकते हैं.'

इंडिया के सुपर सिक्स
भारतीय गेंदबाज़ों और वो भी तेज़ गेंदबाज़ों की ऐसी हैसियत होगी, ये शायद ही किसी ने सोचा होगा. वैसे इस वक्त भारतीय क्रिकेट के पास केवल जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और ईशांत शर्मा भर नहीं हैं. इन तीनों को बराबरी का टक्कर देने वाले उमेश यादव और भुवनेश्वर कुमार भी मौजूद हैं. इनके अलावा मिले मौकों पर गति के मामले में हार्दिक पांड्या भी इनसे होड़ लेते नज़र आते हैं.

यानी इस समय में कम से कम छह गेंदबाज़ हैं, जो एक दूसरे को रिप्लेस करने का दमखम रखते हैं. इसलिए दुनिया भर के क्रिकेट विश्लेषक भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों के आक्रमण को सर्वश्रेष्ठ बता रहे हैं. 2018 में औसत स्पीड के लिहाज से भी भारतीय गेंदबाज़ नंबर एक साबित हुए हैं, भारत के गेंदबाज़ों ने पूरे साल 136 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से कहीं तेज़ गेंदबाज़ी की है.

इसे आप भारतीय क्रिकेट का सबसे सुनहरा दौर कह सकते हैं. नहीं तो 1932 में टेस्ट क्रिकेट में शुरुआत करने के बाद भी भारतीय टेस्ट टीम मैच जिताने वाले तेज़ गेंदबाज़ों का रोना रोती रही थी. 1932 में भारत के पहले टेस्ट मैच में मोहम्मद निसार के रूप में भारत को तेज़ गेंदबाज़ ज़रूर मिला था, लेकिन जो महज छह टेस्ट मैच खेल पाए.

No comments:

Post a Comment