दो जनवरी को 50 साल से कम उम्र की दो महिलाओं ने सबरीमला मंदिर में प्रवेश किया था. इसमें से एक महिला कनकदुर्गा पर तथाकथित हमला किया गया है.
वे इस वक़्त केरल के कोझिकोड सरकारी अस्पताल में भर्ती हैं, जहां डाक्टरों ने उनकी चोट का स्कैन किया है और अब स्कैन की रिपोर्ट का इंतज़ार किया जा रहा है.
ये हमला उनकी सास ने उनपर तब किया जब वो आज सुबह सबरीमला मंदिर के दर्शन के बाद अपने घर वापस लौटीं.
कनकदुर्गा के साथ मंदिर में प्रवेश करने वाली बिंदु अम्मिनी ने बताया, ''उनकी सास ने उनके सिर पर वार किए. ये हमला तब किया गया जब वह अपने आज सुबह अपने घर पहुंची. ''
पेरिनथलमन्ना की 40 साल की बिंदु और कन्नूर की 39 साल की कनकदुर्गा ने दो जनवरी को मंदिर में प्रवेश करने में सफ़ल हुई थीं. दोनों महिलाओं को प्रदर्शनकारियों से सुरक्षा प्रदान करते हुए पुलिसकर्मियों ने मंदिर में दाखिल किया था.
28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं को स्वामी अयप्पा के मंदिर परिसर में जाने की अनुमति दे दी थी. ऐसी प्रथा है कि स्वामी अयप्पा ब्रह्मचारी हैं और माहवारी की आयु की महिलाएं अंदर नहीं जा सकती हैं. लेकिन इन दो महिलाओं ने सालों पुरानी परंपरा तोड़ी.
कनकदुर्गा नायर समुदाय से हैं. वो आज सुबह साढ़े सात बजे ही अपने घर लौटी थीं. अब तक वो और उनकी साथी बिंदु, सुरक्षा कारणों से अपने रहने की जगह कई बार बदल चुकी थीं. जब उन्होंने सबरीमला में प्रवेश करने की पहली कोशिश की थी तभी से दक्षिणपंथी हिंदूवादी संगठन, उनके घर के बाहर प्रदर्शन करते रहे हैं.
कनकदुर्गा और बिंदु को मिलाने वाले सोशल मीडिया ग्रुप के एक सदस्य ने अपना नाम उजागर ने करने की शर्त पर बीबीसी हिंदी से बात की. उन्होंने कहा, "उसे घर में घुसते ही डंडे से मारा गया. उसे एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया गया लेकिन बाद में मलापुरम के सरकारी अस्पताल में शिफ़्ट कर दिया गया."
बिंदु कहती हैं, "ये घरेलू मामला है. ये सच है कि उनके पति, कनकदुर्गा के सबरीमला जाने के पक्ष में नहीं थे. लेकिन अब इस घटना के बाद वो पूरी तरह से कनकदुर्गा के साथा हैं. "
इन महिलाओं के सात सबरीमला मंदिर जाने वाले डा. प्रसाद अमोरे कहते हैं, '' उनका परिवार नहीं चागता था कि वो गर वापस आएं. क्योंकि उन्होंने घर की साख को खराब किया है. उनका परिवार सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के ख़िलाफ़ था. ''
उधर बिंदु ने अब दोबारा लॉ कॉलेज में पढ़ाना शुरू कर दिया है. बीबीसी हिंदी से बातचीत में उन्होंने कहा,"मैं अपने छात्रों और साथी अध्यापकों के बीच बड़े आराम से हूँ. वे सब लोग मुझे पूरा सहयोग दे रहे हैं"
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