一提到鲨鱼,恐怕人们就会联想到由史蒂文·斯皮尔伯格导演的美国惊悚经典片《大白鲨》。
但鲨鱼与人类癌症之间有什么联系呢?
科学家经过研究相信,大白鲨有可能可以帮助人类治疗癌症。
根据首批绘制的大白鲨DNA(脱氧核糖核酸)揭示,其DNA中的“突变”可以保护大白鲨免受癌症和其它疾病的困扰。
科学家希望通过更多的研究,使其研究结果能够帮助治疗人类一些与衰老有关的疾病。
大白鲨在进化过程中具有修复其DNA的能力,这一点我们人类却没有。
这一研究是由美国佛罗里达州诺瓦东南大学(Nova Southeastern University in Florida)“拯救我们海洋基金会鲨鱼研究中心”(Save Our Seas Foundation Shark Research Centre)的科学家小组进行的。
人类不稳定的基因使我们容易患上癌症以及与老年相关的疾病。
而鲨鱼基因中有什么特别保护机制是我们人类所缺乏的呢?
鲨鱼已经生存了许多年,它们在1600万年前就开始“称霸海洋”。有些品种的鲨鱼可以长达20英尺,重达3吨。
为了能永远处在巅峰状态,鲨鱼在进化过程中DNA可以自我修复,而且对出现的破损容忍性也更强。
该研究小组的负责人之一史夫基博士表示,基因组不稳定是人类许多严重疾病中所面对的一个重要问题。
但是有些长寿型动物,例如鲨鱼等大型动物似乎在进化过程中找到了对策来维持基因组的稳定。
我们人类可以从它们身上学到很多东西,因为有太多的信息等待我们去开发。这些信息将可能对人类对抗癌症和与老年有关的疾病有帮助。
同时,它还可以帮助人类改善创伤的治疗。
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鲨鱼的DNA比人的DNA大一倍半,意味着鲨鱼DNA中携带的一些密码我们人类还暂时没有。
科学家希望能破解这些秘密,让它们服务于人类。
由于鲨鱼具有从重伤中迅速恢复的能力,专家相信它可以用于帮助人类的伤口愈合和血块凝固问题。
这或许还有助于减轻人们对鲨鱼的偏见。其实,人类杀死的鲨鱼数量远远多于鲨鱼攻击人类的数量。
此外,研究还显示鲨鱼在人类对付全球气候变暖中扮演重要角色。由于鲨鱼的捕食,有效地控制了海洋小生物的数量,因为这些海洋生物释放出更多的二氧化碳。
那么,是否体积越大,细胞发生变异的可能性就越大呢?
之前有研究称,个头高的人从理论上来讲,体内发生癌变的可能性要高于相对矮小的人。
对此,一种主要的理论解释是个头高的人体内的细胞数量也更多。
因为通常来讲,细胞越多其在复制和分裂的过程中出现基因突变的可能性就越高。
但专家强调,同吸烟相比其风险率要小得多。
同人类相比,大象的体积要大得多,而且平均可以活到60到70岁。大象的细胞数量要比人类多100倍,但为什么大象患癌症的比例却比人类低得多?
美国犹他大学的儿科肿瘤学家希夫曼(Joshua Schiffman)发现,大象有40份TP53基因,该基因帮助抑制肿瘤细胞的生长和扩散。
相比之下,人类和大多数其它动物只有两套TP53基因。因此,希夫曼和其研究伙伴怀疑,这些多余的基因备份可能帮助大象抗癌。
显然,有些动物在进化过程中找到了对付癌症的“聪明战术”,或许人类也可以从中学习和借鉴,让它为人类服务,因为毕竟人类是“最聪明的动物”。
Monday, February 25, 2019
Tuesday, February 19, 2019
जानें कब जारी होगा परीक्षा परिणाम, सामने आई रिज़ल्ट में देरी की वजह
नई दिल्ली. आरआरबी ग्रुप डी की परीक्षा के रिज़ल्ट का अभ्यर्थियों को बेसब्री से इंतज़ार है। लेकिन उनके इंतज़ार की घड़ियां कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही है। वही अब इस रिज़ल्ट में देरी का कारण भी सामने आया है। दरअसल माना जा रहा है कि आरआरबी एएलपी और टेक्नीशियन के पदों पर हुई परीक्षा के बाद आंसर की जारी की गई है। अगर इस आंसर की के साथ ही आरआरबी ग्रुप डी का रिज़ल्ट डिक्लेयर कर दिया जाता तो आरआरबी की वेबसाइट के हैंग होने की आशंका थी लिहाज़ा रिज़ल्ट को अभी रोक दिया गया है। माना जा रहा है कि आरआरबी ग्रुप डी का रिज़ल्ट अब फरवरी की आखिरी तारीख यानि 28 फरवरी या फिर मार्च में जारी हो सकता है। इससे पहले इस रिज़ल्ट के सोमवार को जारी होने की पूरी संभावना थी। लेकिन शाम होते-होते ये खबरें आई कि रिज़ल्ट आज भी जारी नही होगा। वही अभी भी रिज़ल्ट कब डिक्लेयर किया जाएगा इसको लेकर भी कोई पुख्ता जानकारी नही मिल रही है। किसी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रिज़ल्ट 28 फरवरी, 2019 को घोषित हो सकता है तो कोई मार्च में रिज़ल्ट जारी होने की बात कह रहा है।
1 करोड़ से ज्यादा अभ्यर्थियों ने दी है परीक्षा
आपको बता दें कि लगभग 1 करोड़ 17 लाख उम्मीदवारों ने ये परीक्षा दी है। और परीक्षा के बाद से ही सभी को रिज़ल्ट का इंतज़ार था। पहले 17 फरवरी यानि रविवार को रिज़ल्ट जारी होने की पूरी संभावना थी लेकिन रविवार को रिज़ल्ट डिक्लेयर नहीं हुआ इसके बाद सोमवार को परीक्षा परिणाम घोषित होने का इंतज़ार सभी को था लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
कहां से लें अपडेट
आपको बता दें कि किसी भी सूचना पर विश्वास करने से पहले आप आरआरबी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अपडेट ज़रूर ले लें। या फिर आरआरबी की अपने रीज़न की वेबसाइट पर क्लिक करें।
एक्टर राहुल देव भी शाहरुख के सपोर्ट में आए हैं। उन्होंने ट्विटर पर लिखा- वे अपने काम के जरिए लोगों को पिछले 3 दशकों से प्रेरित कर रहे हैं। देश के असली ग्लोबल एम्बेसडर हैं शाहरुख। क्या आप सच में शाहरुख की छवि को इस तरह खराब कर सकते हैं ? बंद कीजिए झूठी खबरें फैलाना।
हालांकि शाहरुख के बचाव में आए फैन्स ने उनके द्वारा देश में कई मौकों पर की गई मदद के बारे में बता रहे हैं। कुछ का कहना है देश में एक ऐसा नेता बता दो, जिसने 12 गांव गोद लिए हों।
शाहरुख के मीर फाउंडेशन ने पिछले साल केरल में आई बाढ़ के दौरान सीएम रिलीफ फंड में 12 लाख रुपए डोनेट किए थे।
2015 में शाहरुख की कंपनी रेड चिलीज की ओर से 1 करोड़ रुपए चेन्नई में बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए सीएम रिलीफ फंड में दिए गए।
1 करोड़ से ज्यादा अभ्यर्थियों ने दी है परीक्षा
आपको बता दें कि लगभग 1 करोड़ 17 लाख उम्मीदवारों ने ये परीक्षा दी है। और परीक्षा के बाद से ही सभी को रिज़ल्ट का इंतज़ार था। पहले 17 फरवरी यानि रविवार को रिज़ल्ट जारी होने की पूरी संभावना थी लेकिन रविवार को रिज़ल्ट डिक्लेयर नहीं हुआ इसके बाद सोमवार को परीक्षा परिणाम घोषित होने का इंतज़ार सभी को था लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
कहां से लें अपडेट
आपको बता दें कि किसी भी सूचना पर विश्वास करने से पहले आप आरआरबी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अपडेट ज़रूर ले लें। या फिर आरआरबी की अपने रीज़न की वेबसाइट पर क्लिक करें।
एक्टर राहुल देव भी शाहरुख के सपोर्ट में आए हैं। उन्होंने ट्विटर पर लिखा- वे अपने काम के जरिए लोगों को पिछले 3 दशकों से प्रेरित कर रहे हैं। देश के असली ग्लोबल एम्बेसडर हैं शाहरुख। क्या आप सच में शाहरुख की छवि को इस तरह खराब कर सकते हैं ? बंद कीजिए झूठी खबरें फैलाना।
हालांकि शाहरुख के बचाव में आए फैन्स ने उनके द्वारा देश में कई मौकों पर की गई मदद के बारे में बता रहे हैं। कुछ का कहना है देश में एक ऐसा नेता बता दो, जिसने 12 गांव गोद लिए हों।
शाहरुख के मीर फाउंडेशन ने पिछले साल केरल में आई बाढ़ के दौरान सीएम रिलीफ फंड में 12 लाख रुपए डोनेट किए थे।
2015 में शाहरुख की कंपनी रेड चिलीज की ओर से 1 करोड़ रुपए चेन्नई में बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए सीएम रिलीफ फंड में दिए गए।
Wednesday, February 13, 2019
रफ़ाल डील को लेकर कई और चौंकाने वाली बातें सामने आएंगीः एन. राम
अंग्रेजी अख़बार द हिंदू में हाल ही में रफ़ाल को लेकर छपी एक रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है.
वरिष्ठ पत्रकार एन. राम की इस रिपोर्ट में दस्तावेज़ों के हवाले से कहा गया है कि रफ़ाल सौदे के वक्त पीएमओ और फ़्रांस के बीच 'समानांतर बातचीत' को लेकर रक्षा मंत्रालय ने एतराज़ जताया था.
इसके बाद द हिंदू ने इस रक्षा डील पर एक और रिपोर्ट छापी जिसमें दावा किया गया कि रफ़ाल सौदे के समय कई नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया.
बीबीसी तमिल संवाददाता मुरलीधरन कासी विश्वनाथन ने हिंदू समूह के प्रमुख रहे और इस रिपोर्ट के लेखक एन. राम से ख़ास बातचीत की:
जवाबः द हिंदू ने इस मुद्दे पर तीन लेख प्रकाशित किए हैं. हमने कुछ दस्तावेज़ों को पेश किया है. मैं आपको वो सब बताता हूं जो हमने अपनी पड़ताल में पाया.
पहली बात है- इन विमानों की क़ीमत. साल 2007 में इस विमान की खरीद की बातचीत शुरू की गई. साल 2012 में इस सौदे की बातचीत में गंभीरता आई. लेकिन साल 2016 में अचानक ये डील ही बदल गई और 126 की जगह 36 विमान खरीदने का फ़ैसला लिया गया.
इसके बाद, इस सौदे से एचएएल का नाम बाहर हो गया. प्रति विमान कीमत काफ़ी ज़्यादा हो गई. अब बात करते हैं इसकी कीमत बढ़ने के कारणों की.
इन विमानों को भारत के लिए कस्टमाइज़ करना था और इसमें कुल 13 स्पेसिफ़िकेशन होने थे. दसो एविएशन ने कहा कि इन विमानों को कस्टमाइज़ करने के लिए 1.4 बिलियन यूरो देने होंगे. इस कीमत को बातचीत के बाद कम करके 1.3 बिलियन यूरो कर दिया गया. जैसे ही 126 की जगह 36 विमान खरीदने का फ़ैसला लिया गया वैसे ही प्रति विमान की कीमत में भारी बढ़ोतरी हो गई.
एक विमान की कीमत में 41% का इज़ाफ़ा हुआ. कई लोगों ने संसद पर इसे लेकर सवाल उठाए लेकिन सरकार ने जवाब नहीं दिया.
सरकार ने कहा कि कीमत का ब्यौरा देने पर दूसरे देशों को भी इसका पता चल जाएगा. इसके अलावा हमने अपनी पड़ताल में पाया कि जिस वक्त रक्षा मंत्रालय और फ्रांस के बीच सौदे को लेकर बात चल रही थी, ठीक उसी वक्त प्रधानमंत्री दफ़्तर और फ़्रांस के बीच भी बातचीत जारी थी.
सेना के लिए गोला-बारूद और अन्य सामग्रियों की खरीद के संबंध में पहले से ही नियम हैं. खरीद से पहले एक विशेषज्ञ टीम का गठन किया जाता है और वह टीम निर्माता और सरकार दोनों के साथ बात करती है.
रक्षा मंत्रालय के दस्तावेज़ों में पता चलता है कि केंद्र सरकार भी उसी समय फ़्रांस से बात कर रही थी, जब विशेषज्ञों की टीम राफ़ाल जेट विमानों की खरीद के लिए दासो और एमबीडीए के साथ बातचीत कर रही थी. एमबीडीए कंपनी जेट के लिए हथियारों की आपूर्ति करने वाली कंपनी है.
'समानांतर बात' का यह मुद्दा निचले स्तर के अधिकारियों से लेकर रक्षा सचिव तक की ओर से उठाया गया था. उन्होंने कहा कि इस तरह की 'समानांतर बातचीत' से भारत और फ़्रांस के बीच बातचीत कमज़ोर होगी. उन्होंने ये भी कहा कि फ्रांस की कंपनी इस स्थिति का इस्तेमाल कर सकती है और वह भारत के ख़िलाफ़ जा सकती है. यह विशेष फ़ाइल पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को भेजी जा रही थी.
आमतौर पर पर्रिकर इस तरह के दस्तावेजों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं लेकिन इस बार उन्होंने इस फ़ाइल को अपने तक ही सीमित रखा था. लंबे वक्त तक उन्हें ये समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना चाहिए. कुछ वक़्त बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री ने एक नोट लिखा, जिसमें कहा गया कि उत्तेजित ना हो और प्रधानमंत्री के सचिव से बात करके इस मुद्दे को सुलझा लिया जाए.
अगर पर्रिकर रक्षा सचिव के इन सवालों से सहमत ना होते तो इस पर प्रतिक्रिया ना देते.
2016 के सितंबर महीने में, रफ़ाल सौदे पर हस्ताक्षर करने से पहले कुछ अन्य चीजें भी हुईं. उन आठ नियमों की उपेक्षा की गई, जिन्हें गोला-बारूद खरीदते समय पालन करने की आवश्यकता होती है. इसमें रिश्वतखोरी के खिलाफ नियम भी शामिल है. सरकार ने 'पेनल्टी फॉर अनड्यू इंफ्लूएंस' नियम को भी हटा दिया.
ये नियम कहता है, '' कमिशन के नाम पर ली गई रिश्वत पर सज़ा होनी चाहिए. इसके अलावा वित्तीय स्थिरता से जुड़े नियमों में भी रियायतें दी गईं. ये सब कुछ बिलकुल आख़िरी वक्त में हुआ जब प्रधानमंत्री दफ़्तर ने मामले में हस्तक्षेप किया.''
वरिष्ठ पत्रकार एन. राम की इस रिपोर्ट में दस्तावेज़ों के हवाले से कहा गया है कि रफ़ाल सौदे के वक्त पीएमओ और फ़्रांस के बीच 'समानांतर बातचीत' को लेकर रक्षा मंत्रालय ने एतराज़ जताया था.
इसके बाद द हिंदू ने इस रक्षा डील पर एक और रिपोर्ट छापी जिसमें दावा किया गया कि रफ़ाल सौदे के समय कई नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया.
बीबीसी तमिल संवाददाता मुरलीधरन कासी विश्वनाथन ने हिंदू समूह के प्रमुख रहे और इस रिपोर्ट के लेखक एन. राम से ख़ास बातचीत की:
जवाबः द हिंदू ने इस मुद्दे पर तीन लेख प्रकाशित किए हैं. हमने कुछ दस्तावेज़ों को पेश किया है. मैं आपको वो सब बताता हूं जो हमने अपनी पड़ताल में पाया.
पहली बात है- इन विमानों की क़ीमत. साल 2007 में इस विमान की खरीद की बातचीत शुरू की गई. साल 2012 में इस सौदे की बातचीत में गंभीरता आई. लेकिन साल 2016 में अचानक ये डील ही बदल गई और 126 की जगह 36 विमान खरीदने का फ़ैसला लिया गया.
इसके बाद, इस सौदे से एचएएल का नाम बाहर हो गया. प्रति विमान कीमत काफ़ी ज़्यादा हो गई. अब बात करते हैं इसकी कीमत बढ़ने के कारणों की.
इन विमानों को भारत के लिए कस्टमाइज़ करना था और इसमें कुल 13 स्पेसिफ़िकेशन होने थे. दसो एविएशन ने कहा कि इन विमानों को कस्टमाइज़ करने के लिए 1.4 बिलियन यूरो देने होंगे. इस कीमत को बातचीत के बाद कम करके 1.3 बिलियन यूरो कर दिया गया. जैसे ही 126 की जगह 36 विमान खरीदने का फ़ैसला लिया गया वैसे ही प्रति विमान की कीमत में भारी बढ़ोतरी हो गई.
एक विमान की कीमत में 41% का इज़ाफ़ा हुआ. कई लोगों ने संसद पर इसे लेकर सवाल उठाए लेकिन सरकार ने जवाब नहीं दिया.
सरकार ने कहा कि कीमत का ब्यौरा देने पर दूसरे देशों को भी इसका पता चल जाएगा. इसके अलावा हमने अपनी पड़ताल में पाया कि जिस वक्त रक्षा मंत्रालय और फ्रांस के बीच सौदे को लेकर बात चल रही थी, ठीक उसी वक्त प्रधानमंत्री दफ़्तर और फ़्रांस के बीच भी बातचीत जारी थी.
सेना के लिए गोला-बारूद और अन्य सामग्रियों की खरीद के संबंध में पहले से ही नियम हैं. खरीद से पहले एक विशेषज्ञ टीम का गठन किया जाता है और वह टीम निर्माता और सरकार दोनों के साथ बात करती है.
रक्षा मंत्रालय के दस्तावेज़ों में पता चलता है कि केंद्र सरकार भी उसी समय फ़्रांस से बात कर रही थी, जब विशेषज्ञों की टीम राफ़ाल जेट विमानों की खरीद के लिए दासो और एमबीडीए के साथ बातचीत कर रही थी. एमबीडीए कंपनी जेट के लिए हथियारों की आपूर्ति करने वाली कंपनी है.
'समानांतर बात' का यह मुद्दा निचले स्तर के अधिकारियों से लेकर रक्षा सचिव तक की ओर से उठाया गया था. उन्होंने कहा कि इस तरह की 'समानांतर बातचीत' से भारत और फ़्रांस के बीच बातचीत कमज़ोर होगी. उन्होंने ये भी कहा कि फ्रांस की कंपनी इस स्थिति का इस्तेमाल कर सकती है और वह भारत के ख़िलाफ़ जा सकती है. यह विशेष फ़ाइल पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को भेजी जा रही थी.
आमतौर पर पर्रिकर इस तरह के दस्तावेजों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं लेकिन इस बार उन्होंने इस फ़ाइल को अपने तक ही सीमित रखा था. लंबे वक्त तक उन्हें ये समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना चाहिए. कुछ वक़्त बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री ने एक नोट लिखा, जिसमें कहा गया कि उत्तेजित ना हो और प्रधानमंत्री के सचिव से बात करके इस मुद्दे को सुलझा लिया जाए.
अगर पर्रिकर रक्षा सचिव के इन सवालों से सहमत ना होते तो इस पर प्रतिक्रिया ना देते.
2016 के सितंबर महीने में, रफ़ाल सौदे पर हस्ताक्षर करने से पहले कुछ अन्य चीजें भी हुईं. उन आठ नियमों की उपेक्षा की गई, जिन्हें गोला-बारूद खरीदते समय पालन करने की आवश्यकता होती है. इसमें रिश्वतखोरी के खिलाफ नियम भी शामिल है. सरकार ने 'पेनल्टी फॉर अनड्यू इंफ्लूएंस' नियम को भी हटा दिया.
ये नियम कहता है, '' कमिशन के नाम पर ली गई रिश्वत पर सज़ा होनी चाहिए. इसके अलावा वित्तीय स्थिरता से जुड़े नियमों में भी रियायतें दी गईं. ये सब कुछ बिलकुल आख़िरी वक्त में हुआ जब प्रधानमंत्री दफ़्तर ने मामले में हस्तक्षेप किया.''
Tuesday, February 5, 2019
आईएनएफ़ संधि: क्या दुनिया हथियारों की होड़ में झोंक दी जाएगी
अमरीका ने शीत युद्ध के दौर के प्रमुख परमाणु हथियार समझौते इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फ़ोर्स यानी आईएनएफ़ संधि को स्थगित कर दिया है.
अमरीका का कहना है कि रूस के क्रूज़ मिसाइल विकसित करने से संधि की शर्तों का उल्लंघन हुआ है.
हालांकि, रूस अमरीका के इस आरोप से लगातार इनकार करता रहा है.
दोनों ही पक्ष संधि का पालन न करने को लेकर एक-दूसरे को लंबे समय से आरोपी ठहराते आए हैं.
फिलहाल अमरीका ने संधि को छह महीनों के लिए स्थगित कर दिया है और अगर रूस के साथ मतभेद हल नहीं होते हैं तो अमरीका संधि से बाहर निकल जाएगा.
दुनिया की महाशक्तियों ने संधि के तहत ज़मीन से मार करने वाली 500 से लेकर 5,500 किलोमीटर की रेंज वाली मध्यम दूरी की मिसाइलों और क्रूज़ मिसाइलों को नष्ट करने और प्रतिबंधित करने पर सहमति जताई थी. इसमें परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह की मिसाइलें शामिल हैं.
1970 में सोवियत रूस ने पश्चिमी यूरोप में एसएस-20 मिसाइल भेजी थी जिनसे नेटो में शामिल देशों की चिंताएं बढ़ गई थीं.
आईएनएफ़ महत्वपूर्ण क्यों है
अमरीका आधारित संस्थान आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के मुताबिक़ इस संधि में पहली बार दोनों महाशक्तियों ने अपने परमाणु शस्त्रागार कम करने, परमाणु हथियारों की पूरी श्रेणी ख़त्म करने और साइट पर व्यापक निरीक्षण की अनुमति देने पर सहमति जताई थी.
आईएनएफ संधि के परिणामस्वरूप, अमरीका और सोवियत संघ ने जून 1991 तक 2,692 छोटी, मध्यम और मध्यवर्ती दूरी की मिसाइलों को नष्ट कर दिया था.
अमरीका साल 2014 से रूस पर मध्यम दूरी की नोवाटोर 9एम729 मिसाइल बनाकर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाता रहा है.
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, रूस के पास संधि को तोड़ने वाली क़रीब 100 मिसाइलें हैं.
अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, ''सालों से रूस बिना किसी पछतावे के आईएनएफ संधि की शर्तों को तोड़ता आ रहा है. एक पक्ष के समझौते का पालन न करने की स्थिति में उसमें बने रहना अच्छा नहीं है.''
वहीं, रूस कहता है कि उसकी मिसाइल 500 किमी से कम की रेंज में है और आरोप लगाता है कि अमरीका का पोलैंड और रोमानिया में ज़मीन से मार करने वाला बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम रूस पर हमले के लिए प्रतिबंधित मिसाइलों के इस्तेमाल में लाया जा सकता है.
जबकी अमरीका का कहना है कि उसका मिसाइल डिफेंस सिस्टम पूरी तरह से आईएनएफ की शर्तों के अनुरूप है.
रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रिएटकोफ ने कहा कि अमरीका का आईएनएफ की संधि से पीछे हटना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा है. उन्होंने ये बात माइक पोम्पियो की घोषणा से पहले कही थी.
उन्होंने कहा, ''यह अंतरराष्ट्रीय हथियार नियंत्रण प्रणाली और सामूहिक विनाश के हथियारों के अप्रसार की प्रणाली के लिए एक गंभीर झटका होगा. एक पक्ष का इसे तोड़ना गैरजिम्मेदाराना रवैया होगा.''
नेटो ने अमरीका के दावे का समर्थन किया है और एक बयान जारी कर रूस को पूरी तरह इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है.
नेटो ने कहा, ''अगर रूस अपनी 9एमएस729 प्रणाली को नष्ट करके आईएनएफ संधि का सम्मान नहीं करता और अमरीका के संधि से निकलने से पहले पूरी तरह संधि का पालन नहीं करता तो रूस इस संधि के ख़त्म होने के लिए अकेला ज़िम्मेदार होगा.''
मार्कस कहते हैं, ''आईएनएफ संधि को स्थगित करने और उससे निकलने की प्रक्रिया शुरू करने के फैसले ने परमाणु हथियारों की दौड़ की अशंकाएं पैदा कर दी हैं. वहीं, ये हथियार नियंत्रण संधियां उस वक्त टूटने की स्थिति में हैं जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है.''
आईएनएफ़ का टूटना एसटीएआरटी संधि के लिए भी अच्छा संकेत नहीं है. साल 2010 में हुई यह संधि लंबी दूरी की रणनीतिक मिसाइलों के लिए सीमा निर्धारित करती है. यह संधि 2021 में खत्म हो रही है.
अगर अमरीका और रूस दोनों तैयार होते हैं तो ये संधि पांच साल के लिए आगे बढ़ाई जा सकती है. लेकिन, कई विश्लेषकों की चिंताएं हैं कि वर्तमान में बिगड़ते राजनीतिक हालात में इस महत्वपूर्ण संधि को खतरा हो सकता है.
अमरीका में ऐसा धड़ा भी है जो कहता है कि आईएनएफ़ समझौते के बाद से अब तक हालात काफ़ी बदल गए हैं.
जोनाथन मार्कस कहते हैं, ''हो सकता है कि सिर्फ़ अमरीका और रूस के लिए द्विपक्षीय हथियारों पर नियंत्रण का दौर ख़त्म होने जा रहा है. अब चीन भी महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन गया है. अमरीका और रूस के अलावा दस और ऐसे देश हैं जिन्होंने मध्यवर्ती दूरी की परमाणु मिसाइल बनाई हैं.''
अमरीका का कहना है कि रूस के क्रूज़ मिसाइल विकसित करने से संधि की शर्तों का उल्लंघन हुआ है.
हालांकि, रूस अमरीका के इस आरोप से लगातार इनकार करता रहा है.
दोनों ही पक्ष संधि का पालन न करने को लेकर एक-दूसरे को लंबे समय से आरोपी ठहराते आए हैं.
फिलहाल अमरीका ने संधि को छह महीनों के लिए स्थगित कर दिया है और अगर रूस के साथ मतभेद हल नहीं होते हैं तो अमरीका संधि से बाहर निकल जाएगा.
दुनिया की महाशक्तियों ने संधि के तहत ज़मीन से मार करने वाली 500 से लेकर 5,500 किलोमीटर की रेंज वाली मध्यम दूरी की मिसाइलों और क्रूज़ मिसाइलों को नष्ट करने और प्रतिबंधित करने पर सहमति जताई थी. इसमें परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह की मिसाइलें शामिल हैं.
1970 में सोवियत रूस ने पश्चिमी यूरोप में एसएस-20 मिसाइल भेजी थी जिनसे नेटो में शामिल देशों की चिंताएं बढ़ गई थीं.
आईएनएफ़ महत्वपूर्ण क्यों है
अमरीका आधारित संस्थान आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के मुताबिक़ इस संधि में पहली बार दोनों महाशक्तियों ने अपने परमाणु शस्त्रागार कम करने, परमाणु हथियारों की पूरी श्रेणी ख़त्म करने और साइट पर व्यापक निरीक्षण की अनुमति देने पर सहमति जताई थी.
आईएनएफ संधि के परिणामस्वरूप, अमरीका और सोवियत संघ ने जून 1991 तक 2,692 छोटी, मध्यम और मध्यवर्ती दूरी की मिसाइलों को नष्ट कर दिया था.
अमरीका साल 2014 से रूस पर मध्यम दूरी की नोवाटोर 9एम729 मिसाइल बनाकर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाता रहा है.
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, रूस के पास संधि को तोड़ने वाली क़रीब 100 मिसाइलें हैं.
अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, ''सालों से रूस बिना किसी पछतावे के आईएनएफ संधि की शर्तों को तोड़ता आ रहा है. एक पक्ष के समझौते का पालन न करने की स्थिति में उसमें बने रहना अच्छा नहीं है.''
वहीं, रूस कहता है कि उसकी मिसाइल 500 किमी से कम की रेंज में है और आरोप लगाता है कि अमरीका का पोलैंड और रोमानिया में ज़मीन से मार करने वाला बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम रूस पर हमले के लिए प्रतिबंधित मिसाइलों के इस्तेमाल में लाया जा सकता है.
जबकी अमरीका का कहना है कि उसका मिसाइल डिफेंस सिस्टम पूरी तरह से आईएनएफ की शर्तों के अनुरूप है.
रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रिएटकोफ ने कहा कि अमरीका का आईएनएफ की संधि से पीछे हटना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा है. उन्होंने ये बात माइक पोम्पियो की घोषणा से पहले कही थी.
उन्होंने कहा, ''यह अंतरराष्ट्रीय हथियार नियंत्रण प्रणाली और सामूहिक विनाश के हथियारों के अप्रसार की प्रणाली के लिए एक गंभीर झटका होगा. एक पक्ष का इसे तोड़ना गैरजिम्मेदाराना रवैया होगा.''
नेटो ने अमरीका के दावे का समर्थन किया है और एक बयान जारी कर रूस को पूरी तरह इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है.
नेटो ने कहा, ''अगर रूस अपनी 9एमएस729 प्रणाली को नष्ट करके आईएनएफ संधि का सम्मान नहीं करता और अमरीका के संधि से निकलने से पहले पूरी तरह संधि का पालन नहीं करता तो रूस इस संधि के ख़त्म होने के लिए अकेला ज़िम्मेदार होगा.''
मार्कस कहते हैं, ''आईएनएफ संधि को स्थगित करने और उससे निकलने की प्रक्रिया शुरू करने के फैसले ने परमाणु हथियारों की दौड़ की अशंकाएं पैदा कर दी हैं. वहीं, ये हथियार नियंत्रण संधियां उस वक्त टूटने की स्थिति में हैं जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है.''
आईएनएफ़ का टूटना एसटीएआरटी संधि के लिए भी अच्छा संकेत नहीं है. साल 2010 में हुई यह संधि लंबी दूरी की रणनीतिक मिसाइलों के लिए सीमा निर्धारित करती है. यह संधि 2021 में खत्म हो रही है.
अगर अमरीका और रूस दोनों तैयार होते हैं तो ये संधि पांच साल के लिए आगे बढ़ाई जा सकती है. लेकिन, कई विश्लेषकों की चिंताएं हैं कि वर्तमान में बिगड़ते राजनीतिक हालात में इस महत्वपूर्ण संधि को खतरा हो सकता है.
अमरीका में ऐसा धड़ा भी है जो कहता है कि आईएनएफ़ समझौते के बाद से अब तक हालात काफ़ी बदल गए हैं.
जोनाथन मार्कस कहते हैं, ''हो सकता है कि सिर्फ़ अमरीका और रूस के लिए द्विपक्षीय हथियारों पर नियंत्रण का दौर ख़त्म होने जा रहा है. अब चीन भी महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन गया है. अमरीका और रूस के अलावा दस और ऐसे देश हैं जिन्होंने मध्यवर्ती दूरी की परमाणु मिसाइल बनाई हैं.''
Sunday, February 3, 2019
बिहारः सीमांचल एक्सप्रेस हादसे में 6 की मौत, मुआवज़े की घोषणा
रविवार की सुबह बिहार के जोगबनी से दिल्ली आ रही 12487 सीमांचल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई. जिसमें अब तक 6 लोगों के मौत की पुष्टि हुई है वहीं 24 अन्य घायल हैं. घायलों का इलाज सदर अस्पताल हाजीपुर में किया जा रहा है.
सुबह चार बजे के क़रीब हाजीपुर-बछवाड़ा रेलखंड के महनार और सहदोई स्टेशन के बीच सहदेई बुज़ुर्ग में हुए इस हादसे में ट्रेन की 11 बोगियां पटरी से उतर गईं.
हादसे के कारणों का अभी पता नहीं चला है. रेलवे ने जांच के आदेश दे दिये हैं. इस दुर्घटना के बाद कई ट्रेनों की रूट में बदलाव किये गये हैं.
हादसे के बाद रेलवे ने मुआवजे की घोषणा की है. हादसे में मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख ,गंभीर रूप से घायलों को एक-एक लाख रुपये और मामूली रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये मुआवज़ा देने की घोषणा हुई है. साथ ही इलाज का पूरा ख़र्च रेलवे उठाएगी.
घटनास्थल से नीरज प्रियदर्शी बीबीसी को जानकारी दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि एसी के तीन डिब्बे पूरी तरह पलट गए हैं और अंदर कई यात्रियों के फंसे होने की आशंका है.
आपदा प्रबंधन विभाग के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बीबीसी को बताया, "अभी तक सात लोगों की मौत हुई हैं. इनमें से छह की पहचान कर ली गई है. मृतकों में तीन बिहार के खगड़िया ज़िले से और तीन पश्चिम बंगाल के यात्री हैं. एक मृतक की पहचान अभी नहीं हो सकी है. सभी घायलों को सदर अस्पताल हाजीपुर में भर्ती कराया गया है."
रेल मंत्री पीयूष योयल के साथ ही रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने इस दुर्घटना पर दुख प्रकट किया है.
पीटीआई ने पूर्व मध्य रेलवे के प्रवक्ता राजेश कुमार के हवाले से बताया कि हादसा तड़के चार बजे के करीब हुआ जिसमें सीमांचल एक्सप्रेस के 11 डिब्बे पटरी से उतरे हैं.
राजेश कुमार ने बताया कि हादसे में एक जनरल कोच, एक एसी कोच बी3, तीन स्लीपर कोच एस8, एस9, एस10 समेत चार अन्य कोच पटरी से उतरे हैं.
उन्होंने बताया कि 12487 जोगबनी-आनंदविहार एक्सप्रेस दुर्घटना के वक्त तेज़ रफ़्तार से दौड़ रही थी.
राजेश कुमार के मुताबिक हादसे की जानकारी मिलते ही सोनपुर और बरौनी से डॉक्टरों की टीम को घटनास्थल पर रवाना कर दिया गया था जो घटनास्थल पर पहुंच चुकी है और बचाव कार्य जारी है.
सोनपुर रेलमंडल से अधिकारियों की टीम भी मौके पर पहुंच गई है.
एडीजी रेलवे की पीआर स्मिता वत्स ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि एनडीआरएफ की दो टीमें घटनास्थल पर पहुंच गई है.
सुबह चार बजे के क़रीब हाजीपुर-बछवाड़ा रेलखंड के महनार और सहदोई स्टेशन के बीच सहदेई बुज़ुर्ग में हुए इस हादसे में ट्रेन की 11 बोगियां पटरी से उतर गईं.
हादसे के कारणों का अभी पता नहीं चला है. रेलवे ने जांच के आदेश दे दिये हैं. इस दुर्घटना के बाद कई ट्रेनों की रूट में बदलाव किये गये हैं.
हादसे के बाद रेलवे ने मुआवजे की घोषणा की है. हादसे में मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख ,गंभीर रूप से घायलों को एक-एक लाख रुपये और मामूली रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये मुआवज़ा देने की घोषणा हुई है. साथ ही इलाज का पूरा ख़र्च रेलवे उठाएगी.
घटनास्थल से नीरज प्रियदर्शी बीबीसी को जानकारी दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि एसी के तीन डिब्बे पूरी तरह पलट गए हैं और अंदर कई यात्रियों के फंसे होने की आशंका है.
आपदा प्रबंधन विभाग के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बीबीसी को बताया, "अभी तक सात लोगों की मौत हुई हैं. इनमें से छह की पहचान कर ली गई है. मृतकों में तीन बिहार के खगड़िया ज़िले से और तीन पश्चिम बंगाल के यात्री हैं. एक मृतक की पहचान अभी नहीं हो सकी है. सभी घायलों को सदर अस्पताल हाजीपुर में भर्ती कराया गया है."
रेल मंत्री पीयूष योयल के साथ ही रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने इस दुर्घटना पर दुख प्रकट किया है.
पीटीआई ने पूर्व मध्य रेलवे के प्रवक्ता राजेश कुमार के हवाले से बताया कि हादसा तड़के चार बजे के करीब हुआ जिसमें सीमांचल एक्सप्रेस के 11 डिब्बे पटरी से उतरे हैं.
राजेश कुमार ने बताया कि हादसे में एक जनरल कोच, एक एसी कोच बी3, तीन स्लीपर कोच एस8, एस9, एस10 समेत चार अन्य कोच पटरी से उतरे हैं.
उन्होंने बताया कि 12487 जोगबनी-आनंदविहार एक्सप्रेस दुर्घटना के वक्त तेज़ रफ़्तार से दौड़ रही थी.
राजेश कुमार के मुताबिक हादसे की जानकारी मिलते ही सोनपुर और बरौनी से डॉक्टरों की टीम को घटनास्थल पर रवाना कर दिया गया था जो घटनास्थल पर पहुंच चुकी है और बचाव कार्य जारी है.
सोनपुर रेलमंडल से अधिकारियों की टीम भी मौके पर पहुंच गई है.
एडीजी रेलवे की पीआर स्मिता वत्स ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि एनडीआरएफ की दो टीमें घटनास्थल पर पहुंच गई है.
Friday, February 1, 2019
नया डायरेक्टर चुनने के लिए मोदी की अध्यक्षता में बैठक आज, 80 अफसरों के नाम दिए गए
सीबीआई में नए डायरेक्टर की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में चयन समिति की बैठक आज होगी। यह इस पैनल की दूसरी बैठक है। इससे पहले 24 जनवरी को यह मीटिंग हुई थी, लेकिन इस पर कोई नतीजा नहीं निकल पाया था। आलोक वर्मा को डायरेक्टर पद से हटाए जाने के बाद एम नागेश्वर राव को अंतरिम चीफ बनाया गया है।
उम्मीदवारों की पूरी जानकारी मांगी- खड़गे
पैनल के सदस्यों में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी शामिल हैं। एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि शुक्रवार को बैठक होना तय हुई है। उसने इस संबंध में और ज्यादा जानकारी नहीं दी।
पिछली बैठक में पैनल ने समिति के सदस्यों को योग्य उम्मीदवारों के नाम सुझाए थे। खड़गे ने इस बारे में कहा था- सरकार ने 70-80 नाम पेश किए। उनके एक्सपीरियंस और करियर के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। हमने सभी जरूरी जानकारियां मुहैया कराने की बात कही थी।
वर्मा-अस्थाना दोनों को एजेंसी से हटाया गया
पूर्व चीफ आलोक वर्मा और पूर्व स्पेशल डायरेक्टर आलोक वर्मा ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। जिसके बाद दोनों को छुट्टी पर भेज दिया गया था। हालांकि, 9 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा को पद पर बहाल कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार समिति ने वर्मा को सीबीआई चीफ की पोस्ट से हटा दिया था। उन्हें सिविल डिफेंस, फायर सर्विसेस और होम गार्ड विभाग का डायरेक्टर जनरल बनाया गया था। वर्मा ने इसे स्वीकार न करते हुए इस्तीफा दे दिया था।
17 जनवरी को अस्थाना का भी सीबीआई से तबादला कर दिया गया था। उनके साथ तीन अन्य अफसरों को भी जांच एजेंसी से हटा दिया गया था। उन्हें सिविल एविएशन सिक्युरिटी ब्यूरो में महानिदेशक बनाया गया था।
वर्मा-अस्थाना ने लगाए थे एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप
2016 में सीबीआई में नंबर दो अफसर रहे आरके दत्ता का तबादला गृह मंत्रालय में कर अस्थाना को लाया गया था।
दत्ता भावी निदेशक माने जा रहे थे, लेकिन गुजरात कैडर के आईपीएस अफसर राकेश अस्थाना सीबीआई के अंतरिम चीफ बना दिए गए।
अस्थाना की नियुक्ति को वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। इसके बाद फरवरी 2017 में आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ बनाया गया।
सीबीआई चीफ बनने के बाद आलोक वर्मा ने अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर बनाने का विरोध कर दिया। उन्होंने कहा था कि अस्थाना पर कई आरोप हैं, वे सीबीआई में रहने लायक नहीं हैं।
अस्थाना स्पेशल डायरेक्टर बनाए गए। लेकिन मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े एक मामले की जांच के बाद अस्थाना और वर्मा ने एक-दूसरे पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए।
उम्मीदवारों की पूरी जानकारी मांगी- खड़गे
पैनल के सदस्यों में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी शामिल हैं। एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि शुक्रवार को बैठक होना तय हुई है। उसने इस संबंध में और ज्यादा जानकारी नहीं दी।
पिछली बैठक में पैनल ने समिति के सदस्यों को योग्य उम्मीदवारों के नाम सुझाए थे। खड़गे ने इस बारे में कहा था- सरकार ने 70-80 नाम पेश किए। उनके एक्सपीरियंस और करियर के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। हमने सभी जरूरी जानकारियां मुहैया कराने की बात कही थी।
वर्मा-अस्थाना दोनों को एजेंसी से हटाया गया
पूर्व चीफ आलोक वर्मा और पूर्व स्पेशल डायरेक्टर आलोक वर्मा ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। जिसके बाद दोनों को छुट्टी पर भेज दिया गया था। हालांकि, 9 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा को पद पर बहाल कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार समिति ने वर्मा को सीबीआई चीफ की पोस्ट से हटा दिया था। उन्हें सिविल डिफेंस, फायर सर्विसेस और होम गार्ड विभाग का डायरेक्टर जनरल बनाया गया था। वर्मा ने इसे स्वीकार न करते हुए इस्तीफा दे दिया था।
17 जनवरी को अस्थाना का भी सीबीआई से तबादला कर दिया गया था। उनके साथ तीन अन्य अफसरों को भी जांच एजेंसी से हटा दिया गया था। उन्हें सिविल एविएशन सिक्युरिटी ब्यूरो में महानिदेशक बनाया गया था।
वर्मा-अस्थाना ने लगाए थे एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप
2016 में सीबीआई में नंबर दो अफसर रहे आरके दत्ता का तबादला गृह मंत्रालय में कर अस्थाना को लाया गया था।
दत्ता भावी निदेशक माने जा रहे थे, लेकिन गुजरात कैडर के आईपीएस अफसर राकेश अस्थाना सीबीआई के अंतरिम चीफ बना दिए गए।
अस्थाना की नियुक्ति को वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। इसके बाद फरवरी 2017 में आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ बनाया गया।
सीबीआई चीफ बनने के बाद आलोक वर्मा ने अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर बनाने का विरोध कर दिया। उन्होंने कहा था कि अस्थाना पर कई आरोप हैं, वे सीबीआई में रहने लायक नहीं हैं।
अस्थाना स्पेशल डायरेक्टर बनाए गए। लेकिन मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े एक मामले की जांच के बाद अस्थाना और वर्मा ने एक-दूसरे पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए।
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